A dream worth listening. @darshan_h_sheth

I woke up today , having dreamt early morning at 4 AM . I was in the biggest DLF Mall of India looking to buy a pair of socks and a neck tie .

As I walked in, I noticed a sweater with a price tag of RS 9000 .Next to the sweater were a pair of Jeans for Rs.10000 .The socks were Rs.8000 ! And Tie for astonishing 16,000 /-

I went looking for a salesperson and found one in the watch Dept

He was showing a man a Rs. 225/- Rolex watch . I looked in the glass case and there was a 4 carat diamond ring also on sales for Rs.95/-

Shocked I asked the salesperson “How could a Rolex watch sell for Rs.225/- ? ,and a cheap pair of socks sell for Rs. 8000/-“?

He said “Someone slid into the store last night and changed the price tag on everything “.

“Everyone is confused , people are acting like they have lost their sense of value”. “They are willing to pay lots of money for things of little value ,and very little money for things of great value ”

“Its like they don’t know what is really valuable and what’s not ” . I hope we get the price tags back-on right soon ,I really pity , seeing people paying way too much for things of little value “

I woke up startled & confused and thinking since then …

Maybe our life is like this dream.

Maybe someone slid into our lives and changed the price on everything

Maybe they marked up the value of competition, position, titles, fame , promotion, show-off , money and power !

…And put a huge discount on the value of Happiness , Family , Relationships, Peace of mind , Contentment , Love , Knowledge , Kindness , Friendships…

Maybe We are all living this dream…

I hope…… we wake up, well in-time.

धर्म संस्थापक योगेश्वरः योगीराज महामना भगवान श्री कृष्ण के 5247वें जनमोत्स्व की सभी राष्ट्रवासियों को ढेर सारी शुभकामनाएं!

धर्म संस्थापक योगेश्वरः योगीराज महामना भगवान श्री कृष्ण के 5247वें जनमोत्स्व की सभी राष्ट्रवासियों को ढेर सारी शुभकामनाएं!
यतो धर्मस्तत: कृष्णो यत: कृष्णस्ततो जय: (महाभारत भीष्मपर्व ४३/६०)

“जहाँ धर्म हैं, वहाँ कृष्ण है और जहाँ श्री कृष्ण है, वही विजय है”। श्री कृष्ण नाम ही पवित्रता का प्रतीक है। वेद के मन्त्रो में मन्त्र तथा ब्राह्मण विद्वान के मिश्रण ही से कृष्ण शब्द का उद्गम होता है। श्री कृष्ण भगवान वेदों के वो ज्ञाता ज्ञानी विद्वान विरले पुरुष थे , जो नित्य यज्ञ अग्निहोत्र सन्ध्याउपाश्ना से निराकार प्रभु ओम की स्तुति करने वाले परम् धार्मिक मनुष्य थे , कृष्ण जी को योगेश्वरः कृष्ण भी कहा जाता है क्योंकि यह एक ब्रह्मचारी संयमी एक पत्नीव्रता धर्म निभाने वाले अथार्त श्री राम के पद्चिन्हों पर चलने वाले शुद्ध पुरुष थे न कि राधा के श्याम गोपियों के घनश्याम । प्रेम के आघात साँगर को ह्रदय में समा लेने वाले प्रेमी गोसेवक गोमाता के सच्चे पुत्र थे श्री कृष्ण जी। साथ ही एक महान कूटनीतिज्ञ ओर बुद्धिमान पराक्रमी योद्धा भी, जिन्होंने बिना अस्त्र-शस्त्र धारण किये अधर्मी कौरवों का सर्वनाश कर धर्म की स्थापना की इसलिए श्री कृष्ण को धर्म संस्थापक भी कहते है। श्री कृष्ण युद्ध नीति में सबसे प्रबल बलवान बुद्धिमान पुरुष थे इनके धनुष का नाम सारंग, खड्ग का नाम नंदक, गदा का नाम कोमोदकी, रथ का जेत्र व सारथी का नाम दारुक ओर अश्वो का नाम शैव्य-सुग्रीव बलाहक तथा चक्र का नाम शुदर्षन था ।

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